ऊर्जा संरक्षण

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ऊर्जा संरक्षण (एनकॉन) पहल :

एचपीसीएल की रिफाइनरियॉं अपनी विभिन्‍न संसाधन इकाइयों में कच्‍चे तेल को बहुमूल्‍य पेट्रोलियम उत्‍पादों में परिवर्तित करने के लिए ईंधन, भाप, बिजली इत्‍यादि जैसे ऊर्जा के विभिन्‍न रूपों का प्रयोग करती हैं। अधिकतर रिफाइनरी प्रक्रियाएं ऊर्जा गहन होती हैं और रिफाइनरी में निर्मित तैयार माल भाग को अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को प्राप्‍त करने के लिए प्रयुक्त करती हैं। इस तरह प्रत्‍यक्ष रूप से ऊर्जा की खपत में किसी भी प्रकार की कटौती से तैयार उत्‍पाद की उपलब्‍धता बढ़ती है, जिससे मुनाफा अधिक होता है। अत: ऊर्जा संरक्षण का सीधा प्रभाव रिफाइनरी के मुनाफे पर पड़ता है ।

एचपीसीएल ने ऊर्जा संरक्षण को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी है और इसका समर्पित ऊर्जा संरक्षण (एनकॉन) कक्ष है जिसमें दैनंदिन आधार पर एनकॉन उपायों पर निगरानी रखने के लिए प्रबंधक और इंजीनियर हैं। कॉर्पोरेशन के निरंतर प्रयास से ऊर्जा के इष्‍टम प्रयोग से अधिकतम स्‍तर प्राप्‍त करने के लिए कई अनुसंधान और विकास पहल की गई है। कॉर्पोरेशन में सभी श्रेणियों के अधिकारियों के एनकॉन गतिविधियों संबंधी ज्ञान को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। भावी परियोजनाओं को कॉर्पोरेशन के ऊर्जा सक्षम मानकों के अनुरूप बनाने के लिए तैयार किया गया है।

एचपीसीएल रिफाइनरियों में विभिन्न एनकॉन उपाय:

  1. अतीत में क्रियान्वित ऊर्जा संरक्षण उपाय इस प्रकार हैं :
    • भाप, बिजली इत्यादि के उत्पादन के लिए को-जेनरेशन सिद्धांत अपनाना जिसमें एफसीसीयू को – बायॅलर का इंस्टॉलेशन शामिल है।
    • फायर्ड हीटरों का आधुनिकीकरण
    • क्रूड प्रीहीट को पिंच प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए हीट एक्सचेंज ट्रेन से अधिकतम करना
    • अपशिष्ट हीट का प्रभावी उपयोग
    • इंस्ट्रूमेंटेशन और उन्नत नियंत्रण कार्यनीतियों का आधुनिकीकरण
  2. एचपीसीएल देश की तेल कंपनियों में पहली कंपनी है जिसने दोनों रिफाइनरियों के अपनी ऑफसाइट सुविधाओं में पूर्ण ऑटोमेशन आरंभ तथा कार्यान्वित किया। सुविधाओं में निम्नलिखित शामिल है:
    • टैंक गेजिंग और इनवेन्ट्री प्रबंधन प्रणाली का आटोमेशन
    • उन्नत ऑन-लाइन ब्लेंड नियंत्रण
    • संकटपूर्ण उत्पादों/स्ट्रीम की गुणवत्ता की सतत ऑन-लाइन निगरानी
    • कस्टडी ट्रांस्फर परिचालन का सटीक मापन और निगरानी
    • संकटपूर्ण ऑफ-साइट ट्रांसफर पम्पों की सतत निगरानी

    ऑफसाइट ऑटोमेशन सुविधाएं हानि कम करने, गुणवत्‍ता में सुधार, उत्‍पाद लेखाकरण और डिस्‍टीलेशन की समग्र उपज सुधारने के लिए विभिन्‍न रिफाइनरी स्‍ट्रीमों के आबंटन को इष्‍टतम करने के लिए तैयार किया गया है। नई परियोजनाओं को बहु स्‍तरीय प्रक्रियाओं में हर चरण में अपडेट लेकर कार्यान्वित किया गया है ताकि समग्र निष्‍पादन में कुशलता में कोई अप्रिय हानि न हो।

    इन परियोजनाओं के भाग के रूप में, कस्‍टमाइज़ सॉफ्टवेयर पैकेज का व्‍यापक प्रयोग किया गया है और रिफाइनरी परियोजनाएँ कार्यान्वित करने के लिए कस्‍टमाइज़ किया गया है । इन सॉफ्टवेयरों से विभिन्‍न उत्‍पादों की मांग तथा विद्यमान मूल्‍यों के आधार पर इष्‍टतम क्रूड मिक्‍स निर्धारित करने और संयंत्र निष्‍पादन इष्‍टतम करने और नियत क्षमता के भीतर अधिकतम आउटपुट हासिल करने के लिए उत्‍पाद स्‍लेट करने में सहायता मिली है।

    ऊर्जा सक्षमता के अनुरक्षण के लिए हाल ही के वर्षों में कार्यान्वित परियोजनाएं भारतीय परिप्रेक्ष्‍य में उत्‍कृष्‍ट रही हैं। एचपीसीएल ने भारतीय संदर्भ में उत्‍कृष्‍ट प्रचालन कार्यपद्धतियों की दिशा में उल्‍लेखनीय प्रयास किए है जिनका आनेवाले वर्षों में संगठनों में पालन किया जाएगा।

  3. मेसर्स ब्रिटिश पेट्रोलियम द्वारा मुंबई रिफाइनरी के लिए विस्तृत हाइड्रोकार्बन हानि अध्ययन किया गया है और विभिन्न संस्तुतियों को कार्यान्वित किया गया है।
  4. दोनों रिफाइनरियों ने एनकॉन निष्पादन को सुधारने के लिए ऊर्जा संरक्षण गतिविधियां आयोजित कीं, जो इस प्रकार हैं:
    • सूट डिपोसिशन से बचने के लिए साउंड वेव्स के काइनेटिक एनर्जी के प्रयोग के लिए बॉयलर हाउस में सोनिक बूट ब्लोअर्स इंस्टॉल किए गए हैं । इसके परिणामस्वरूप पारंपरिक स्टीम सूट ब्लोअर्स की तुलना में अधिक स्टीम बचत हुई है।
    • रिफाइनरियों में अतिरिक्त हवा को नियंत्रित करने के लिए फर्नेस / बॉयलर्स में ऑन- लाइन ऑक्सीजन एनेलाइजर्स प्रदान किए गए हैं। ये उपकरण फ्लू गैस की ऑक्सीजन मात्रा को निरंतर मापते रहते हैं। फ्लू गैस में ऑक्सीजन की मात्रा की जॉंच से फर्नेस सक्षमता को सुधारने में सहायक होता है ।
    • प्रत्येक फर्नेस फ्यूल खपत की निगरानी के लिए विभिन्न फर्नेस/हीटरों में मास फ्लो मीटर इंस्टॉल किए गए हैं।
    • दोनों रिफाइनरियों में फ्लेर स्टैक पर चौबीस घंटे निगरानी/नियंत्रण के लिए सीसीटीवी इंस्टॉल किए गए हैं।
    • समय-समय पर सटीक टैंक तापमान को रजिस्टर करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक थर्मोप्रोब्स इंस्टॅाल किए गए हैं। तापमान की रीडिंग की त्रुटियों के कारण हाइड्रोकार्बन हानि में पूर्व में दर्शाई गई थी, को सटीक टैंक तापमान से लेखाकरण से त्रुटियां कम करता है।
    • विशाख रिफाइनरी की दूसरी विस्तार परियोजना के अंतर्गत एफसीसीयू –I के रूप में एक सीओ-बॉयलर इंस्टॉल किया जा रहा है। सीओ-बॉयलर, एफसीसीयू फ्लू गैस से हीट और स्टीम की जरूरी मात्रा निकाल लेता है।

उपर्युक्‍त एनकॉन परियोजनाओं के परिणामस्‍वरूप 2008-2009 के दौरान विशाख रिफाइनरी की ईधन और हानि 5.7 डब्ल्यूटी % तक कम हुई है। इसी अवधि के दौरान विशिष्‍ट ऊर्जा खपत 85.78 एमबीटीयू/बीबीएल/एनआरजीएफ से कम हुई है।

इसी क्रम में मुंबई रिफाइनरी में उल्‍लेखनीय सुधार हुआ है और वर्तमान में मुंबई रिफाइनरी की ईंधन और हानि 6.5 डब्ल्यूटी % तक सीमित है विशिष्‍ट ऊर्जा खपत 92.5 एमबीटीयू/बीबीएल/एनआरजीएफ पर स्थिर ही है। ये आंकड़ें क्षमता स्‍तर को दर्शाते हैं जो अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों के अनुरूप है।