नई परियोजनाएं

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अद्यतनीकरण और पहल

प्रक्रिया में सुधार, प्रदर्शन, सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी विषयों पर परियोजनाओं को पहचानना और उनका कार्यान्वयन एक सतत प्रक्रिया है। मुंबई और विशाख रिफाइनरियों द्वारा निम्नलिखित नई परियोजनाएं सुविधाओं के उन्नयन के साथ उत्पाद की मांग को पूरा करने के लिए शुरू किए गए हैं:

  1. यूरो-III और IV ग्रेड गैसोलीन के लिए सुविधाएं: मुंबई रिफाइनरी ने हरित ईंधन और उत्सर्जन नियंत्रण परियोजना (जीएफईसीपी) और विशाख रिफाइनरी में यूरो –III/ IV ग्रेड गैसोलीन के साथ यूरो IV एमएस के उत्पादन के लिए स्वच्छ ईंधन परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। एमएस गुणवत्ता शर्तों को पूरा करने के अलावा परियोजना में नाफ्था को गैसोलीन में उन्नत करने की क्षमता है जो मूल्य वर्धित उत्पाद है।
  2. मुंबई रिफाइनरी में नई एफसीसीयू परियोजना: एलपीजी, एमएस और एचएसडी जैसे मूल्य वर्धित उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने के लिए रिफाइनरी 1.4 एमएमटीपीए क्षमता की नई एफसीसीयू संस्थापित कर रही है, जो एफसीसीयू संसाधन क्षमता को 1 एमएमटीपीए के वर्तमान स्तर को 2.4 एमएमटीपीए को बढ़ाएगी।
  3. पर्यावरण सुविधाएं: प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा निर्धारित वायु प्रदूषण सीमाओं का अनुपालन करने के लिए एकीकृत एफ्लूएंट ट्रीटमेंट संयंत्र संस्थापित कर दोनों रिफाइनरियों में पर्यावरणीय सुविधाओं को अद्यतन किया जा रहा है।
  4. बॉटम अप परियोजनाएं: मुंबई रिफाइनरी ने प्रोप्राइटरी प्रौद्योगिकी ‘रेसीडूम ऑयल सुपरक्रिटिकल एक्सट्रैक्शन (रोज) ‘का प्रयोग कर ‘सॉल्वेंट डीएस्फाल्टिंग यूनिट (एसडीए)‘ का संभाव्यता अध्ययन शुरू किया है। इस संयंत्र की स्थापना से क्रूड के भारी अंश (वीटीबी) से मूल्यवान तेल प्राप्ति बढ़ने की संभावना है।

    इसी प्रकार से विशाख रिफाइनरी ने बॉटम अप उन्‍नयन के लिए विलंबित कोकर यूनिट (डीसीयू) परियोजनाएं कार्यान्वित करने की योजना बनाई है।

  5. एलओबीएस परियोजना: मुंबई रिफाइनरी एलओबीएस की विभिन्न श्रेणियों का निर्माण करता है |जिसमें सल्फर 300 पीपीएम से अधिक होता है और 90% से कम में नम होता है जो एपीआई ग्रेड -1 श्रेणी के अंतर्गत आता है। घरेलू बाज़ार में इसी एलओबीएस गुणवत्ता और एपीआई ग्रेड ।।/।।। श्रेणी की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इसकी क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। परियोजना एचपीसीएल को एलओबीएस बाज़ार हिस्सेदारी को कायम रखने में सहायक होगी। परियोजना जनवरी 2010 में पूर्ण की गई है।
  6. एमआर/वी.आर. डीएचटी: दोनों रिफाइनरियाँ यूरो-III / IV एचएसडी के उन्नयन / उत्पादन के लिए डीएचटी परियोजनाएं शुरू कर रही हैं और मुंबई का प्रोजेक्ट पूरा हो चुका है। विशाख डीएचटी परियोजना जारी है और एसआरयु का परीक्षण चालू है। दोनों रिफाइनरियों मुंबई रिफाइनरी (346 KB)PDF File  पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है। और विशाख रिफाइनरी (357 KB)PDF File पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है। के डीएचटी परियोजनाओं के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस प्राप्त किए जा चुके हैं।

    आंध्र प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (APPCB) को वित्तीय वर्ष 2013-14 के लिए विशाख रिफाइनरी का पर्यावरण विवरण (124 KB)PDF File पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है। प्रस्तुत किया गया है। डीएचटी वी.आर. परियोजना के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस शर्तों के अनुपालन की स्थिति देखें। (104 KB)PDF File पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है।
  7. विशाख रिफाइनरी स्थित एलपीजी / प्रोपीलीन के माउंडेड भंडारण प्रणाली की आधुनिकिकरण परियोजना:विशाख रिफाइनरी एलपीजी और प्रोपीलीन के लिए मौजूदा एलपीजी / प्रोपीलीन हॉर्टन गोलों के स्थान पर माउंडेड भंडारण प्रणाली निष्पादित कर रही है। यह एक जोखिमभरी न्यूनीकरण परियोजना है और बाहरी सुरक्षा एजेंसियों, जैसे हाई पावर स्टीयरिंग समिति अगस्त, 1998, फोर्थ राऊन्ड ईएसए - सितंबर, 1999 आदि, द्वारा दी गई सिफारिशों को ध्यान में रख कर किए जा रहे हैं। एलपीजी की माउंडेड भंडारण सुविधा उसके थल-स्तरीय भंडारण टैंकों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित साबित हुई है क्योंकि यह आंतरिक रूप से निष्क्रिय है और सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के साथ बॉयलिंग लिक्विड एक्सपैंडिग वेपर एक्सप्लोज़न (BLEVE) की संभावना को घटने से रोकता है। इस स्वीकृत परियोजना की लागत रुपए 124 करोड़ हैं।
    इस परियोजना को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (एमओईएफ) द्वारा उनके पत्र क्रं. एफ.क्रं. J-11011/66/2007-IA II (I) दिनांकित 7 मार्च, 2008 पर्यावरण की मंजूरी दी है। अनुपालन रिपोर्ट देखें। (38 KB)PDF File पीडीएफ फाइल जो नई विंडों में खुलती है।
  8. विशाख रिफाइनरी आधुनिकीकरण परियोजना (वीआरएमपी) : परियोजना का उद्देश्य विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में मौजूदा विशाख रिफाइनरी की क्षमता 8.33 एमएमटीपीए से 15 एमएमटीपीए की क्षमता तक बढ़ाने के लिए है। परियोजना में नई 9 एमएमटीपीए जमीनी स्तरों की सुविधा, परिष्कृत और मौजूदा इकाइयों का सुधार और क्षमता विस्तार, यूटिलिटी सिस्टम की वृद्धि, एकीकृत प्रवाह नियंत्रण प्रणाली, ऑफसाइट सुविधाएँ, कैप्टिव पावर प्लांट और अन्य संबंधित सुविधाएं शामिल हैं। परियोजना की लागत 20928 करोड़ रुपये है और अनुसूचित यांत्रिक पूर्णता 2020 है। 31 दिसंबर, 2016 को पीएमसी सेवाओं के लिए मैसर्स ईआईएल पर फैक्स ऑफ स्वीकृति (एफओए) लगाया गया है। पर्यावरण मंजूरी और अनुपालन विवरण देखें