अनुसंधान और विकास

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एचपीसीएल ने उत्‍पादन क्षमता और अन्‍य औद्योगिक पैरामीटर को बढ़ाने के लिए कई शैक्षणिक / अनुसंधान संस्‍थानों के साथ सहभागिता की। परियोजनाओं का विवरण (विशेषत: सहभागिता में भागीदार) इस प्रकार है :

  1. द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्‍टीट्यूट (टीइआरआई) बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं।,नई दिल्‍ली : परियोजना को ‘बायो – हाइड्रोजन उत्‍पादन के लिए सक्षम माइक्रोबायल स्‍ट्रेन की स्‍क्रीनिंग और चयन’ नाम दिया गया है। परियोजना को पूर्ण करने के लिए 24 महीनों की अनुमानित समय सीमा निर्धारित की गई है ।
  2. गांधी इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नॉलॉजी एंड मैनेजमेंट (जीआइटीएएम) बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं।, विशाखापट्नम: जीआईटीएएम के साथ अपेक्षित परियोजनाएं इस प्रकार हैं :
    • ल्‍यू‍ब्रिकेंट्स में ल्‍यूब्रिकेटिंग गुणों को शामिल करने के लिए नैनो कणों का प्रभाव 2 वर्षों के भीतर पूर्ण की जानी है ।
    • बायोरेमेडियल: नॉन – पैथोजेनिक माइक्रोऑर्गेनिस्‍म पेट्रोलियम ऑयल का बायो डिस्‍ल्‍फराइज़ेशन एक वर्ष के भीतर पूर्ण करना अपेक्षित है ।
    • नॉन पैथोजेनिक माइक्रोऑर्गेनिस्‍म द्वारा पेट्रोलियम ऑयल के बायोरेमेडिएशन का एक वर्ष की समय – सीमा के भीतर उत्‍पादन।
  3. इंडियन इस्‍टीट्यूट ऑफ साइंस (आइआइएससी) बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं।,बैंगलोर: ‘सोसाइटी फॉर इनोवेशन एंड डेवेलपमेंट’ (एसआईडी), आईआईएससी का नवोन्‍मेषी केन्‍द्र और आईआईएससी की ओर से एचपीसीएल के साथ सहभागिता करेगा। दोनों पार्टियों के बीच हस्‍ताक्षरित समझौता ज्ञापन के कार्यक्षेत्र में अनुसंधान और विकास केन्‍द्र की स्‍थापना और विभिन्‍न सहभागी परियोजनाएं शामिल हैं । वर्तमान में, नेनो कणों पर परियोजना ली गई है |
  4. सेन्‍ट्रल इंस्‍टीट्यूट फॉर माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च (सीआइएमएफआर, पूर्व में सीएफआरआई) बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं।, धनबाद : इस परियोजना में तीन बॉटम स्‍ट्रीम अर्थात वीटीबी, एफसीसी और पीडीए बॉटम की विशेषताएं शामिल हैं जिसमें सीआईएमएफआर स्थित प्रायोगिक संयंत्र का प्रयोग किया गया । एक 100 किग्रा/घंटे के संयंत्र के इंस्‍टॉलेशन की योजना प्र्सतावित है। एक स्वतः परिपूर्ण निगम अनुसंधान और विकास केन्‍द्र स्‍थापित किया जाएगा जिसमें संयंत्र के प्रचालन और परीक्षण के लिए डिज़ाइनिंग, कमीशनिंग, पर्यवेक्षण, प्रोटोकॉल के प्राप्‍त डाटा की व्‍याख्‍या की एकीकृत सुविधाएं होंगी।
  5. रिसर्च ट्राएंगल इंस्‍टीट्यूट (आरटीआई) बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं।,यूएसएस: परियोजना में आरटीआई और एचपीसीएल के बीच सहभागी अनुसंधान और विकास गतिविधियां शामिल हैं जिनमें निम्‍नलिखित एक या एक से अधिक क्षेत्र शामिल हैं:
    • एक कैटेलिस्‍ट प्रयोगशाला स्‍थापित करने और संश्लेषण और मूल्‍यांकन के लिए संबद्ध विकास हेतु सलाहकार।
    • डीज़ल डीसल्‍फराइज़ेशन के साथ स्‍केल अप प्रदर्शन, प्रोटोकॉल, ज्ञान हस्‍तांतरण और 2010 गुणवत्‍ता मानकों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के लिए आईपी उपलब्‍धता ।
    • कैरेक्‍टराइज़ेशन सहित‍ रेसिड गैसिफिकेशन ।
  6. एडवांस्‍ड रिसर्च टेक्‍नॉलोजी (एआरटी), चेवरॉन और आईआईटी कानपुर बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं।: एचपीसीएल ने निम्‍नलिखित संगठनों के साथ समझौता ज्ञापन किया गया है:
    • एडवांस रिफाइनिंग टेक्‍नॉलोजी एलएलसी (एआरटी)
    • चेवरॉन, यूएसए आइएनसी और
    • इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नॉलोजी (आईआईटी, कानपुर
  7. खाद्य श्रेणी हैक्‍सेन निर्माण यूनिट का इष्‍टतम अध्‍ययन और पॉलीमर ग्रेड हेक्‍सेन (आईआईपी के साथ) उत्‍पादन का संभाव्‍यता अध्‍ययन

    वर्तमान में मुंबई रिफाइनरी में सल्‍फर और बेन्‍झीन तत्‍व के संदर्भ में अधिक कठोर विनिर्देशों के डब्‍यूएचओ और पॉलीमर श्रेणी हेक्‍सेन, जिसकी बाज़ार में अधिक मांग है, के उत्‍पादन की संभावना का पता लगाने संयंत्र की प्रचालन परिस्थितियों को 2004-05 के दौरान इष्‍टतम करने के लिए आइआइपी के साथ अध्‍ययन किया गया ।

    आईआईपी, देहरादून बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं। के साथ संयुक्‍त रूप से परीक्षण किया गया, जिसने योजना में कुछ सुधार कर सतत आधार पर 500 से कम पीपीएम एरोमेटिक के साथ डब्‍ल्‍यूएचओ श्रेणी हेक्‍सेन के उत्‍पादन की संभाव्‍यता की पुष्टि की है ।

    तथापि, डब्‍ल्‍यूएचओ श्रेणी हेक्‍सेन के पीएएच (पॉलीक्लिनिक एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन) और एनवीएम (नॉन वॉलेटाइल मैटर) जैसे अन्य विर्निदशनों को पूर्ण करने के लिए मेसर्स आईआईपी द्वारा अब भी अध्‍ययन किया जा रहा है।

  8. एनएमपी ल्‍यूब एक्‍स्‍ट्रेक्‍शन यूनिट इष्‍टतमीकरण अध्‍ययन (आईआईपी)

    विशिष्‍ट उत्‍पाद गुणवत्‍ता और अधिकतम थ्रुपुट प्राप्‍त करने के लिए मुंबई रिफाइनरी एनएमपी ल्‍यूब एक्‍सट्रेक्‍शन यूनिट प्रचालन पैरामीटर इष्टतम करने के लिए आईआईपी के साथ 2004-05 में अध्‍ययन शुरू किया गया था। हाइड्रोफाइनिंग की तीव्रता को बढ़ाकर और उचित कैटेलिस्‍ट के चयन से रंग, सल्‍फर और सैचुरेट में सुधार की भी संभावना है । यूनिट में हीट एक्‍सचेंजर्स की पिंच विश्लेषण से ऊर्जा की भारी मात्रा में बचत होगी ।

    150 एन और 500 एन की ल्‍यूब सक्षमता का निर्धारण पूर्ण हो चुका है। क्रिटिकल सॉल्‍यूशन टेम्‍परेचर, एलएलई सिंगल स्‍टेज स्‍टडीज़ और प्रारंभिक ग्‍लास पैक्ड कॉलम (जीपीसी) रन्स भी पूरा किया गया। पिंच एवं सिग्यूलेषन अध्ययन भी किया गया। अंतिम रिपोर्ट तैयार और प्रस्‍तुत की गई। संशोधनों में पिंच विश्लेषण से हीट रिकवरी के सुझाव को एनपीसीबी परियोजनाओं द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा।

    आईआईपी – एचपीसीएल कर्मियों द्वारा संयुक्‍त रूप से नियंत्रित परीक्षण संचालित किया गया। आईआईपी द्वारा फिजि़यो केमिकल कैरेक्‍टराइजेशन के लिए परीक्षण रन सैम्‍पलों का विश्‍लेषण किया गया ।

    ल्‍यूब संभावना का निर्धारण, क्रिटिकल सॉल्‍यूशन टैम्‍परेचर, एलएलई सिंगल स्‍टेज अध्‍ययन, प्रारंभिक ग्‍लास पैक्‍ड कॉलम और पिंच सिमुलेशन अध्‍ययन पूर्ण की जा चुकी हैं और अंतिम रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। संशोधनों को तदुनसार क्रियान्वित जाएगा।

  9. विशाख रिफाइनरी गैस मिक्‍सचर और एलपीजी विशाख रिफाइनरी से गैस मिक्‍सचर और एलपीजी ( ओईआईसीटी बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं। हैदराबाद के साथ)

    प्रॉपीलीन रिकवर करने के लिए मेम्‍बरेन सेपरेशन अध्‍ययन आईआईसीटी हैदराबाद के साथ एलपीजी से प्रॉपीलीन से मेम्‍ब्रेन अलगाव के लिए सहभागी अनुसंधान और विकास जारी है। मेम्‍ब्रेन का सत्‍यापन और शुद्ध गैस के साथ परीक्षण पूर्ण हो चुका है। विभिन्‍न मेम्‍ब्रेन के लिए गैस मिश्रण के साथ परीक्षण रन किया जा रहा है। आईआईसीटी द्वारा फीड क्षमता और सी3 अंश की संयोजन पर आधारित वांछित प्रॉपीलीन शुद्धता और मेम्‍ब्रेन एरिया आवश्‍यकता प्राप्‍त करने के लिए चरणों की संख्‍या निर्धारित करने के लिए सिमुलेशन कार्यक्रम लिखने की प्रक्रिया जारी है ।