पर्यावरण और सुरक्षा

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पर्यावरण हेतु हमारी प्रतिबद्धता

एक जिम्‍मेदार कॉर्पोरेट नागरिक होने के नाते, एचपीसीएल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनका सतत प्रयास रहता है कि उसके बढ़ते प्रचालन से पर्यावरण को कोई हानि न हो। एचपीसीएल ने कॉर्पोरेशन के अंतर्राष्‍ट्रीय प्रमाणित मानक के अंतर्राष्‍ट्रीय सुरक्षा अंकन प्रणाली (आइएसआरएस) के स्‍तर 8 को सतत बरकरार रखा है। पर्यावरण सुरक्षा और संरक्षा उपाय की दिशा में एचपीसीएल के प्रयासों की हर स्‍तर पर सराहना की गई है तथा उसने सरकारी और गैर सरकारी संगठनों से कई पुरस्‍कार जीते हैं।

कॉर्पोरेशन द्वारा अपनाई गई “पर्यावरण नीति” अपने सभी प्रचालनों को इस प्रकार करती है कि पर्यावरण सुरक्षा स्‍वत: सु‍निश्चित होती है । एचपीसीएल की दोनों रिफाइनरियों ने ऐसी प्रणालियां और कार्यपद्धतियां स्‍थापित की हैं जो एमआईएनएएस मानकों और सीपीसीबी और राज्‍य पीसीबी के अन्‍य सांविधि‍क शर्तों का अनुपालन सुनिश्चित करती हैं। रिफाइनरियों में व्‍यापक हरियाली प्रदान की गई है और रिफाइनरियों के आसपास इलाकों में इस हेतु सतत प्रयास जारी हैं। एचपीसीएल अपने कर्मचारियों के सभी श्रेणियों में पर्यावरण जागरूकता का प्रचार-प्रसार करता है तथा हर दिशा में संदेश को फैलाने के लिए सरकार और एनजीओ की सहायता करता है। सतत विकास कार्यनीति के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता बेहद मायने रखती है।

एचपीसीएल के एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्‍लांट, बेकार जल, फ्लोर वॉश वॉटर और टैंक फार्म ड्रेन का ध्यान रखता है। एपीआई और स्किम पॉन्‍ड कूलिंग वॉटर डिस्‍चार्ज की देखरेख करता है। सल्‍फर पुनर्प्राप्ति इकाई द्वारा एसओ2 उत्‍सर्जन नियंत्रित किया जाता है। एफसीसीयू यूनिट सीओ2 जलाने के लिए सीओ बॉयलर है ताकि पर्यावरण में इसकी थोड़ी मात्रा भी न जाए। संयंत्रों की स्‍थापना उत्‍कृष्‍ट औद्योगिक मानकों के साथ पूर्ण क्षमता के प्रयोग की कार्यक्षमता के साथ की गई है। जहॉं तक हाल ही कार्यान्‍वित परियोजनाओं के प्रभाव का संबंध है, उद्योग और पर्यावरण के बीच सर्वोच्‍च सुचारू संतुलन बनाने के लिए अब तक पेट्रोलियम क्षेत्र में अब तक इतनी बारीकी से संपरीक्षा नहीं की गई थी। .

डीएचडीएस जैसी प्रमुख प्रर्यावरण परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं और 0.25% के कम सल्‍फर के साथ एचएसडी के उत्‍पादन के लिए आरंभ की गई हैं। रिफाइनरियों के परिसर में सतत एम्बिएंट एअर मॉनीटरिंग स्‍टेशन है जो परिसर में और परिसर के आस-पास राज्‍य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समन्‍वयन से पर्यावरण और वन मंत्रालय के विनियमों को पूर्ण करने के लिए एम्बिएंट एअर गुणवत्‍ता मापते हैं। एचपीसीएल की पर्यावरण नीति बहु आयामी है जिसमें अलग-अलग उत्‍पादों के लिए विभेदक प्रावधान हैं। ज़ोखिम क्षेत्र की सही पहचान और उचित परियोजनाएं लेने से पर्यावरण सुरक्षा उपायों पर निगरानी रहती है ।

पर्यावरण सुरक्षा उपाय

मुंबई और विशाख रिफाइनरी रिफाइनरियों ने सतत प्रदूषण बोर्ड और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्धारित सांविधिक विनियम और मानकों को पूरा किया है। दोनों रिफाइनरियों को आईएसओ 14001 के रूप में प्रमाणित किया गया है। दोनों रिफाइनरियों ने विभिन्‍न अनुक्रियात्‍मक पर्यावरण सुरक्षा उपाय किए हैं जो इस प्रकार हैं :

  • रिफाइनरी में सभी तीन एम्बिएंट एअर मॉनीटरिंग स्टेशनों में तीन नए आरएसपीएम एनेलाइज़र स्थापित और आरंभ किए गए
  • रिफाइनरी में प्रमुख अग्नि उपकरणों में तेरह स्टैक एनेलाइज़र्स स्थापित और आरंभ किए गए
  • ऑयली स्लज से मेकेनिकल ऑयल रिकवरी शुरू की गई है
  • ऑयली स्लज से मेकेनिकल ऑयल रिकवरी शुरू की गई है
  • ऑयली स्लज के ट्रीटमेंट के बायो रेमेडिएशन फार्म का निर्माण आरंभ किया गया
  • प्रतिदिन कैंटीन वेस्ट के 200 कि.ग्रा को ट्रीट करने के लिए एरोबिक वर्मी बैक्टेरियल सिस्टम आरंभ किया गया
  • मार्च 2010 में मुंबई रिफाइनरी ने डीएचडीएस कॉम्प्लेक्स में सभी फर्नेस की फायरिंग और हाइड्रोजन यूनिट में रिफॉर्मर के फीड के रूप में नाफ्था से रिगैसिफाइड लिक्विड नैचरल गैस (आरएलएनजी) में बदल दिया है। नाफ्था के बजाय आरएलएनजी के प्रयोग के लाभ इस प्रकार हैं:
    • हाइड्रोजन यील्ड लगभग 20% अधिक है
    • डीमिनरलाइज्ड पानी और स्टीम में बचत
    • वृद्धित कैटेलिस्ट आयु और रिफॉर्मर फ्यूल बचत
    • हल्के हाइड्रोकार्बन्स के कारण रिएक्शन रिफॉर्मिंग के लिए कम स्टीम उपयोग
    • नाफ्था की तुलना में सल्फर को हटाने के लिए प्रीट्रीटमेंट की आवश्यकता नहीं है